
मोहाली :
मोहाली में ₹110 करोड़ की लागत से बने टर्शियरी वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट प्लांट को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। पूर्व डिप्टी मेयर कुलजीत सिंह बेदी ने इस परियोजना पर चिंता जताते हुए इसे जनहित में असफल बताया है।
उन्होंने GMADA पर आरोप लगाया है कि भारी निवेश के बावजूद ट्रीटेड सीवेज पानी का सही उपयोग नहीं हो रहा है और इसे दोबारा इस्तेमाल करने की बजाय नालों में बहाया जा रहा है।
बेदी के अनुसार मोहाली में पहले से 15 MGD का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट मौजूद है, लेकिन उसके बाद भी शुद्ध पानी का पुनः उपयोग ठीक से नहीं हो पा रहा है। नया 5 MGD टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट पार्कों, सड़कों की सफाई, शौचालयों, ग्रीन बेल्ट और औद्योगिक उपयोग के लिए पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया गया था।
लेकिन आरोप है कि इसके लिए कोई उचित वितरण व्यवस्था विकसित नहीं की गई, जिसके कारण ट्रीटेड पानी बर्बाद हो रहा है और दूसरी ओर भूजल का उपयोग लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने शहर में बढ़ते भूजल संकट को देखते हुए जल पुनर्चक्रण प्रणाली को तुरंत लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि इस परियोजना का सही तरीके से उपयोग नहीं हुआ तो यह केवल एक “कागजी उपलब्धि” बनकर रह जाएगी।
पूर्व डिप्टी मेयर ने अधिकारियों से अपील की है कि ट्रीटेड पानी के उपयोग के लिए तुरंत प्रभावी ढांचा तैयार किया जाए, ताकि इसे सार्वजनिक सेवाओं में इस्तेमाल किया जा सके और भविष्य के जल संकट को रोका जा सके।