
चंडीगढ़ :
स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर), चंडीगढ़ ने 13 से 17 जुलाई 2026 तक आयोजित पांच दिवसीय इंटरमीडिएट फील्ड एपिडेमियोलॉजी ट्रेनिंग प्रोग्राम (I-FETP) के पहले संपर्क सत्र का सफलतापूर्वक आयोजन किया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) के सहयोग से आयोजित किया गया।
चंडीगढ़ के होटल पार्क व्यू में आयोजित यह प्रशिक्षण प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (PM-ABHIM) के तहत सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में क्षमता निर्माण की एक प्रमुख पहल है। देश में सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यबल को मजबूत करने के उद्देश्य से आई-एफईटीपी का विस्तार 14 क्षेत्रीय हब (रीजनल हब) के राष्ट्रीय नेटवर्क के माध्यम से किया गया है।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पीजीआईएमईआर के सामुदायिक चिकित्सा विभाग एवं स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की प्रोफेसर तथा आई-एफईटीपी की नोडल अधिकारी डॉ. पी.वी.एम. लक्ष्मी के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पीजीआईएमईआर के संकाय सदस्यों और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के विशेषज्ञों ने भी मार्गदर्शन प्रदान किया।
देश के 14 क्षेत्रीय हब में शामिल पीजीआईएमईआर एक वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट सर्टिफिकेट कार्यक्रम संचालित कर रहा है। इसका उद्देश्य प्रत्येक दो लाख की आबादी पर एक प्रशिक्षित महामारी विशेषज्ञ (एपिडेमियोलॉजिस्ट) तैयार करना है, ताकि रोग निगरानी, महामारी की जांच और सार्वजनिक स्वास्थ्य आपदा से निपटने की क्षमता को मजबूत किया जा सके।
प्रशिक्षण के पहले संपर्क सत्र में जम्मू-कश्मीर, पंजाब और हिमाचल प्रदेश से 16 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें मेडिकल ऑफिसर, जिला महामारी विशेषज्ञ (डिस्ट्रिक्ट एपिडेमियोलॉजिस्ट) और जिला सर्विलांस अधिकारी शामिल थे।
व्याख्यान, केस स्टडी, व्यावहारिक अभ्यास और संवादात्मक चर्चाओं के माध्यम से प्रतिभागियों ने रोग निगरानी, डेटा विश्लेषण और महामारी जांच से संबंधित अपने ज्ञान और कौशल को और सुदृढ़ किया।
यह पहला संपर्क सत्र एक वर्ष तक चलने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत है, जिसमें कुल पांच निर्धारित संपर्क सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य क्षेत्र में उच्च प्रशिक्षित महामारी विशेषज्ञों का मजबूत नेटवर्क तैयार करना है।
