
मोहाली:
चंडीगढ़–मोहाली सीमा पर स्थित फेज-7 का वाईपीएस चौक शहर के सबसे बड़े ट्रैफिक जाम वाले क्षेत्रों में से एक बन गया है। पिछले करीब साढ़े तीन वर्षों से चल रहे कौमी इंसाफ मोर्चा के कारण यहां आंशिक बैरिकेडिंग और यातायात प्रतिबंध लागू हैं, जिससे रोजाना हजारों वाहन चालकों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि सितंबर 2023 में सड़क का एक हिस्सा वाहनों के लिए खोल दिया गया था, लेकिन ट्रैफिक डायवर्जन और लंबा जाम आज भी लोगों की मुश्किलें कम नहीं कर पाए हैं।
समस्या को और गंभीर बना रही हैं वाईपीएस चौक के आसपास बनी गहरी सड़कें और बड़े-बड़े गड्ढे, जो वाहन चालकों के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं। प्रतिदिन सैकड़ों वाहनों को नुकसान पहुंचने की शिकायतें सामने आती हैं, जबकि दोपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा लगातार बना रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की खराब हालत के कारण यहां कई छोटे-बड़े हादसे हो चुके हैं।
स्कूल समय में हालात सबसे ज्यादा खराब
वाईपीएस स्कूल और आसपास के अन्य शैक्षणिक संस्थानों के खुलने और छुट्टी के समय ट्रैफिक जाम अपने चरम पर पहुंच जाता है। अभिभावकों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों और रोजाना आने-जाने वाले लोगों के वाहन कई किलोमीटर लंबी कतारों में फंस जाते हैं। इस जाम का असर आपातकालीन सेवाओं पर भी पड़ता है और लोगों का समय तथा ईंधन दोनों बर्बाद होते हैं।
कौमी इंसाफ मोर्चा से जुड़ा मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। सर्वोच्च न्यायालय ने प्रदर्शनकारियों को हटाने संबंधी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों पर फिलहाल रोक लगा रखी है। अंतिम न्यायिक निर्णय आने तक लोगों को ट्रैफिक जाम और अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग
स्थानीय निवासियों और वाहन चालकों ने प्रशासन से मांग की है कि वाईपीएस चौक के आसपास की टूटी सड़क की तत्काल मरम्मत कराई जाए, गड्ढों को भरा जाए, प्रभावी ट्रैफिक प्रबंधन लागू किया जाए तथा स्कूल समय के दौरान विशेष यातायात व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि कानूनी प्रक्रिया अपनी जगह है, लेकिन सड़क सुरक्षा और नागरिक सुविधाएं बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत और ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में दुर्घटनाओं और ट्रैफिक जाम की समस्या और भी गंभीर हो सकती है।
लेकिन आखिर इसकी परवाह किसे है?