खेलछत्तीसगढ़टेक्नोलॉजीटॉप न्यूज़दिल्ली NCRमनोरंजनमहाराष्ट्रमुंबईयुवायूपी

सोशल मीडिया का संतुलित उपयोग विद्यार्थियों के लिए लाभकारी हो सकता है: शिक्षाविद”

सोशल मीडिया का संतुलित उपयोग विद्यार्थियों के लिए लाभकारी हो सकता है: शिक्षाविद”

डिजिटल युग में सोशल मीडिया विद्यार्थियों के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। Facebook, Instagram, YouTube और LinkedIn जैसे प्लेटफॉर्म ने शिक्षा, संवाद और जानकारी प्राप्त करने के तरीकों में बड़ा बदलाव लाया है। हालांकि, इसका प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि इसका उपयोग किस प्रकार किया जाता है। यह विचार चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी, मोहाली के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रिंकू शर्मा ने शिक्षा में सोशल मीडिया की भूमिका पर लिखे अपने लेख में व्यक्त किए।डॉ. शर्मा ने कहा कि यदि सोशल मीडिया का जिम्मेदारी और उद्देश्यपूर्ण तरीके से उपयोग किया जाए, तो यह शिक्षा का एक अत्यंत प्रभावी माध्यम बन सकता है। इसके माध्यम से विद्यार्थी नवीनतम वैज्ञानिक शोध, तकनीकी नवाचारों और वैश्विक घटनाओं से जुड़े रह सकते हैं। विशेष रूप से YouTube जैसे शैक्षणिक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध लेक्चर, ट्यूटोरियल और विषय-विशेष अध्ययन सामग्री विद्यार्थियों को कक्षा शिक्षण से आगे बढ़कर अपनी समझ मजबूत करने में सहायता करती है।उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया विद्यार्थियों के बीच सहयोग और संवाद को भी बढ़ावा देता है। इसके जरिए छात्र-छात्राएं अपने सहपाठियों और शिक्षकों से जुड़कर अध्ययन सामग्री साझा कर सकते हैं, असाइनमेंट पर चर्चा कर सकते हैं तथा विभिन्न परियोजनाओं पर मिलकर कार्य कर सकते हैं। इससे संचार कौशल, रचनात्मक सोच, टीमवर्क और डिजिटल साक्षरता जैसे गुण विकसित होते हैं, जो आज के तकनीक-प्रधान दौर में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।डॉ. शर्मा ने करियर निर्माण में LinkedIn जैसे प्रोफेशनल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म की उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसे प्लेटफॉर्म विद्यार्थियों को उद्योग विशेषज्ञों से जुड़ने, इंटर्नशिप के अवसर तलाशने, करियर संबंधी मार्गदर्शन प्राप्त करने तथा रोजगार के बदलते रुझानों की जानकारी हासिल करने का अवसर प्रदान करते हैं, जिससे वे अपने भविष्य की बेहतर तैयारी कर सकते हैं।हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि सोशल मीडिया का अत्यधिक और अनियंत्रित उपयोग विद्यार्थियों की पढ़ाई और व्यक्तिगत विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। मनोरंजन संबंधी सामग्री पर लंबे समय तक समय बिताना और लगातार आने वाली सूचनाओं (नोटिफिकेशन) में उलझे रहना एकाग्रता को कम करता है, पढ़ाई से ध्यान भटकाता है और समय प्रबंधन को प्रभावित करता है।उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर गलत और भ्रामक जानकारी का तेजी से प्रसार एक गंभीर चिंता का विषय है। विद्यार्थियों को किसी भी जानकारी को स्वीकार करने या साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करनी चाहिए। साथ ही, ऑनलाइन गोपनीयता बनाए रखने, व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा करने और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार अपनाने की भी आवश्यकता है ताकि साइबर जोखिमों से बचा जा सके।डॉ. शर्मा के अनुसार, सोशल मीडिया न तो पूरी तरह लाभदायक है और न ही पूरी तरह हानिकारक। यह एक ऐसा माध्यम है जिसका प्रभाव उसके उपयोग के तरीके पर निर्भर करता है। यदि विद्यार्थी इसका उपयोग सीखने, कौशल विकास और ज्ञान साझा करने के लिए करते हैं, तो यह उनकी शैक्षणिक सफलता और व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। वहीं, यदि इसका अत्यधिक उपयोग केवल मनोरंजन के लिए किया जाए, तो यह शिक्षा और समग्र विकास में बाधा बन सकता है।अपने विचारों के अंत में डॉ. शर्मा ने विद्यार्थियों से सोशल मीडिया का संतुलित, अनुशासित और जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि उद्देश्यपूर्ण ढंग से इस्तेमाल किए जाने पर डिजिटल प्लेटफॉर्म शिक्षा, करियर विकास और आजीवन सीखने के लिए एक मूल्यवान संसाधन साबित हो सकते हैं तथा विद्यार्थियों को आधुनिक दुनिया की चुनौतियों के लिए बेहतर ढंग से तैयार कर सकते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!