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मैनहोल के लिए खोदी सड़क बनी हादसों का खतरा, लोगों की जान जोखिम में: अतुल शर्मा

मैनहोल के लिए खोदी सड़क बनी हादसों का खतरा, लोगों की जान जोखिम में: अतुल शर्मा

मोहाली :

फेज-2 के निवासी अतुल शर्मा ने फेज-2 और फेज-4 को जोड़ने वाली डिवाइडिंग रोड की बदहाल स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि भूमिगत मैनहोल की तलाश के लिए सड़क की खुदाई तो कर दी गई, लेकिन कार्य पूरा होने के बाद टूटी हुई सड़क, डामर के बड़े-बड़े टुकड़े और मलबा सड़क पर ही छोड़ दिया गया है, जिससे यह मार्ग हादसों को खुला निमंत्रण दे रहा है।

अतुल शर्मा ने कहा कि सड़क पर फैला मलबा वाहन चालकों, साइकिल सवारों और पैदल राहगीरों के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। विशेषकर रात के समय और बारिश के दौरान बिना किसी बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड या रिफ्लेक्टर के यह स्थान किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकता है।

उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के लिए सड़क की खुदाई आवश्यक हो सकती है, लेकिन कार्य अधूरा छोड़ देना और मलबा सड़क पर ही पड़ा रहने देना संबंधित विभागों की लापरवाही और जवाबदेही की कमी को दर्शाता है।

अतुल शर्मा ने बताया कि यह समस्या नई नहीं है। वर्ष 2013 में उन्होंने स्थायी लोक अदालत (Permanent Lok Adalat) में ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) तथा पब्लिक हेल्थ एवं वाटर सप्लाई विभाग के विरुद्ध याचिका दायर कर मोहाली की आंतरिक सड़कों और सीवरेज व्यवस्था के उचित रखरखाव की मांग की थी। लेकिन एक दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद हालात में कोई विशेष सुधार दिखाई नहीं देता और आज भी शहर में इसी प्रकार की लापरवाही देखने को मिल रही है।

अतुल शर्मा ने कहा, “लगातार शिकायतों और वर्षों पहले कानूनी कार्रवाई के बावजूद आज भी वही समस्याएं बनी हुई हैं। यह स्थिति एक बड़ा सवाल खड़ा करती है कि आखिर मोहाली के नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?”

उन्होंने नगर निगम मोहाली, जीएमएडीए तथा संबंधित इंजीनियरिंग विभागों से मांग की कि सड़क पर पड़ा मलबा तत्काल हटाया जाए, क्षतिग्रस्त सड़क की शीघ्र मरम्मत कराई जाए तथा भविष्य में किसी भी खुदाई कार्य के दौरान उचित बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेत और निर्धारित समय सीमा में कार्य पूरा करना सुनिश्चित किया जाए, ताकि आम जनता की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।

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