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क्या समुद्र की गहराइयां बनेंगी वैश्विक संघर्ष का नया मोर्चा? अंडरसी केबल्स की सुरक्षा पर बढ़ी चिंता

समुद्र के नीचे इंटरनेट केबल्स, दुर्लभ खनिज और सामरिक मार्ग बने अहम रणनीतिक संपत्ति; भारत भी मजबूत कर रहा अपनी तैयारियां

चंडीगढ़:

समुद्र की गहराइयां वैश्विक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का नया केंद्र बनती जा रही हैं। समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबल्स, महत्वपूर्ण खनिज संसाधन और प्रमुख समुद्री मार्ग अब राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम हो गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, भविष्य में भू-राजनीतिक तनाव के दौरान ये महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे दबाव बनाने का जरिया बन सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट डेटा ट्रैफिक का लगभग 99 प्रतिशत समुद्र के नीचे बिछी फाइबर-ऑप्टिक केबल्स से गुजरता है। ये केबल्स वैश्विक संचार, वित्तीय लेन-देन और डिजिटल सेवाओं को संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। लाल सागर और बाल्टिक सागर में केबल्स को नुकसान पहुंचने की घटनाओं ने इन नेटवर्कों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के संदर्भ में खाड़ी क्षेत्र में समुद्री संचार केबल्स की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई है। ऐसी परिस्थितियां महत्वपूर्ण डिजिटल बुनियादी ढांचे की कमजोरियों और उसकी सुरक्षा की आवश्यकता को उजागर करती हैं।

गहरे समुद्र में खनिजों की खोज

समुद्र की तलहटी में मौजूद कोबाल्ट, निकल, तांबा और मैंगनीज जैसे खनिज भी विभिन्न देशों के लिए महत्वपूर्ण बन रहे हैं। इनका उपयोग बैटरियों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों में किया जाता है। हालांकि, गहरे समुद्र में खनन की व्यावसायिक संभावनाओं के साथ पर्यावरण संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय नियमों से जुड़ी चुनौतियां भी मौजूद हैं।

भारत की समुद्री सुरक्षा पर विशेष ध्यान

भारत अपने डीप ओशन मिशन के तहत गहरे समुद्र में अनुसंधान, समुद्री संसाधनों की खोज और अत्याधुनिक तकनीकों के विकास पर काम कर रहा है। हिंद महासागर में भारत की रणनीतिक स्थिति और समुद्री केबल्स पर बढ़ती निर्भरता को देखते हुए इन नेटवर्कों की सुरक्षा महत्वपूर्ण हो गई है।

जुलाई 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने हिंद महासागर में पनडुब्बियों की गतिविधियों की निगरानी के लिए अंडरवॉटर फाइबर-ऑप्टिक सेंसिंग सिस्टम विकसित करने के उद्देश्य से उद्योग भागीदार की पहचान की प्रक्रिया शुरू की थी।

निष्कर्ष: यह कहना जल्दबाजी होगी कि अगला विश्व युद्ध समुद्र के नीचे लड़ा जाएगा। हालांकि, समुद्री केबल्स, खनिज संसाधनों और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों का रणनीतिक महत्व लगातार बढ़ रहा है। आने वाले समय में इनकी सुरक्षा भारत सहित दुनिया के कई देशों की राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और डिजिटल संचार व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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