सरकारी कॉलेज डेराबस्सी ने लगातार दूसरे वर्ष माइम में हासिल किया पहला स्थान
पंजाबी यूनिवर्सिटी के युवा एवं लोक उत्सव में परांदा बनाने में पहला और मिमिक्री में दूसरा स्थान हासिल किया

डेराबस्सी :
सरकारी कॉलेज डेराबस्सी के विद्यार्थियों ने पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला के युवा कल्याण विभाग द्वारा आयोजित रोपड़-फतेहगढ़ जोन के युवा एवं लोक उत्सव में लगातार दूसरे वर्ष माइम में पहला स्थान हासिल किया। कॉलेज ने परांदा बनाने में भी पहला और मिमिक्री में दूसरा स्थान प्राप्त किया। यह उत्सव श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज, आनंदपुर साहिब में आयोजित किया गया।
कॉलेज ने आठ अन्य श्रेणियों में तीसरा स्थान हासिल किया। इनमें भांड, लोक वाद्य यंत्र, समूह शबद, साहित्यिक गीत, क्रोशिया कार्य, नाला बनाना, पंखी बनाना और छिक्कू बनाना शामिल हैं। इन उपलब्धियों ने विद्यार्थियों की नाटक, संगीत और पारंपरिक लोक कलाओं में प्रतिभा को प्रदर्शित किया।
माइम टीम में आशीष, रोशनी, चेतना, वंश, गुड़ी कुमारी, अरविंदर कुमार और खुशी सक्सेना शामिल थे। चेतना ने मिमिक्री में भाग लिया, जबकि नितेश और हरमंजित सिंह ने भांड श्रेणी में कॉलेज का प्रतिनिधित्व किया। समूह शबद में जसनदीप सिंह, परमवीर सिंह, जशनप्रीत सिंह, अंजलि, जसकीरत कौर और हरकीरत सिंह ने भाग लिया। तरनदीप सिंह ने साहित्यिक गीत प्रस्तुत किया, जबकि विशाल ने लोक वाद्य यंत्र श्रेणी में हिस्सा लिया।
पारंपरिक लोक कला श्रेणियों में सिमरन ने परांदा बनाने में पहला स्थान हासिल किया। पुष्पिंदर कौर ने क्रोशिया कार्य, पूजा ने नाला बनाने, अंकिता ने पंखी बनाने और तनु ने छिक्कू बनाने की प्रतियोगिता में भाग लिया।
इस उत्सव में रोपड़-फतेहगढ़ जोन के 65 कॉलेजों के विद्यार्थियों ने भाग लिया। इस आयोजन ने विद्यार्थियों को अपनी कलात्मक प्रतिभा प्रदर्शित करने और पंजाब की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का अवसर प्रदान किया।
कॉलेज की प्रिंसिपल वनिता राव ने विद्यार्थियों को उनकी उपलब्धियों के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि युवा उत्सव विद्यार्थियों को व्यक्तित्व विकास के साथ कला और साहित्य से जुड़ने के महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि कॉलेज भविष्य में भी ऐसी प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों की भागीदारी को प्रोत्साहित करता रहेगा, ताकि उनके सर्वांगीण विकास को बढ़ावा मिले और वे पढ़ाई के साथ-साथ कलात्मक क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बना सकें।
