रामचंद्र यादव के कांग्रेस में शामिल होते ही बदले नगर निगम के सियासी समीकरण
कांग्रेस बनी सदन की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी, AAP तीसरे पायदान पर; नेता प्रतिपक्ष के पद पर कांग्रेस का दावा मजबूत

चंडीगढ़:
चंडीगढ़ नगर निगम की राजनीति में एक बार फिर बड़ा फेरबदल हुआ है। आम आदमी पार्टी (AAP) के पार्षद रामचंद्र यादव, जिन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में AAP से निष्कासित किया गया था, आज कांग्रेस में शामिल हो गए। उनके कांग्रेस में शामिल होने से नगर निगम सदन का राजनीतिक गणित एक बार फिर बदल गया है।
रामचंद्र यादव के कांग्रेस में शामिल होने के बाद कांग्रेस के पार्षदों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है, जबकि AAP के पास अब 7 पार्षद रह गए हैं। वहीं, 18 पार्षदों के साथ भाजपा नगर निगम सदन में सबसे बड़ी पार्टी बनी हुई है। इस बदलाव के साथ कांग्रेस भाजपा के बाद सदन की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई है, जबकि 2021 के चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी AAP अब तीसरे स्थान पर पहुंच गई है।
पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में हुए थे निष्कासित
आम आदमी पार्टी, चंडीगढ़ ने पार्षद रामचंद्र यादव के खिलाफ पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर कार्रवाई करते हुए उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था। पार्टी की ओर से जारी घोषणा में कहा गया था कि पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते रामचंद्र यादव को तत्काल प्रभाव से आम आदमी पार्टी से निष्कासित किया जाता है।
इससे पहले AAP पार्षद मुनव्वर भी पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। लगातार हो रहे दल-बदल के चलते नगर निगम सदन में AAP का संख्या बल लगातार कमजोर हुआ है।
नेता प्रतिपक्ष के पद पर कांग्रेस का दावा मजबूत
नगर निगम सदन में बदले संख्या बल के बाद नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर भी राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। AAP पहले सदन में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी होने के कारण इस पद पर थी। अब कांग्रेस के पार्षदों की संख्या 10 होने के बाद कांग्रेस का इस पद पर दावा मजबूत हो गया है।
कांग्रेस नेताओं द्वारा जल्द ही नगर निगम आयुक्त और मेयर के समक्ष नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर अपना दावा पेश किए जाने की संभावना है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस पद को लेकर नगर निगम की राजनीति में नई बहस और खींचतान देखने को मिल सकती है।
2021 में 14 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी AAP
वर्ष 2021 के नगर निगम चुनाव में आम आदमी पार्टी ने पहली बार चंडीगढ़ नगर निगम का चुनाव लड़ते हुए शानदार प्रदर्शन किया था। AAP ने 14 सीटें जीतकर सदन में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में अपनी राजनीतिक ताकत दिखाई थी।
हालांकि, चुनाव के बाद लगातार हुए दलबदल के कारण AAP का संख्या बल कम होता गया। पार्टी के पार्षदों की संख्या पहले घटकर 8 हुई और अब रामचंद्र यादव के कांग्रेस में जाने के बाद 7 रह गई है।
वहीं, भाजपा ने भी समय-समय पर विपक्षी दलों के पार्षदों को अपने साथ जोड़कर सदन में अपनी स्थिति मजबूत की है।
दलबदल से लगातार बदलते रहे नगर निगम के समीकरण
चंडीगढ़ नगर निगम की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई पार्षदों के दल बदलने से सदन का राजनीतिक गणित लगातार बदलता रहा है।
कांग्रेस की पार्षद हरप्रीत कौर बाबला भाजपा में शामिल हुईं, जबकि AAP की तरुणा मेहता कांग्रेस में चली गईं। कांग्रेस की वरिष्ठ पार्षद गुरबख्श रावत ने भी भाजपा का दामन थाम लिया।
इसी तरह AAP के पार्षद लखबीर सिंह बिल्लू भाजपा में शामिल हुए, जबकि शिरोमणि अकाली दल के एकमात्र पार्षद हरदीप सिंह AAP में शामिल हुए थे।
पार्षद गुरचरणजीत सिंह काला का राजनीतिक सफर भी नगर निगम की राजनीति में चर्चा का विषय रहा है। वह कांग्रेस से भाजपा, फिर AAP और उसके बाद दोबारा भाजपा में शामिल हुए।
रामचंद्र यादव के कांग्रेस में शामिल होने के बाद एक बार फिर नगर निगम सदन का राजनीतिक संतुलन बदला है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर कांग्रेस के दावे पर मेयर और नगर निगम प्रशासन क्या फैसला लेते हैं।