
मोहाली :
वार्ड नंबर 10 से निर्दलीय पार्षद परमजीत सिंह काहलों ने आरोप लगाया है कि केंद्र की भाजपा सरकार पंजाब के नदी जल से जुड़े मामलों में पिछली कांग्रेस सरकारों की नीतियों को आगे बढ़ा रही है।
पत्रकारों से बातचीत में काहलों ने आरोप लगाया कि पहले पंजाब का पानी राजस्थान को दिया गया और 1966 में पंजाब के पुनर्गठन के बाद हरियाणा को सतलुज और ब्यास के पानी में हिस्सा दिया गया।
काहलों ने कहा कि केंद्र ने भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड से जुड़े पंजाब के अधिकारों को कमजोर किया है। उन्होंने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना में पंजाब को शामिल नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए। 15 सितंबर को इस परियोजना के लिए हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के बीच समझौता हुआ है। परियोजना की लागत का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाना है।
काहलों ने पंजाब सरकार की कथित चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पंजाब के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से समझौते पर पुनर्विचार करने और पंजाब की राजनीतिक पार्टियों से इस मुद्दे को उठाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि पंजाब के नदी जल से जुड़े हितों की रक्षा के लिए राज्य को संबंधित जल समझौतों और निर्णयों में अपनी स्थिति स्पष्ट रूप से रखने का अवसर मिलना चाहिए।