गमाडा अपनी मौजूदा अधिग्रहित जमीन का सही इस्तेमाल करे—नई कृषि भूमि अधिग्रहण की जरूरत ही नहीं पड़ेगी: सतवीर सिंह धनोआ
गमाडा अपनी मौजूदा अधिग्रहित जमीन का सही इस्तेमाल करे—नई कृषि भूमि अधिग्रहण की जरूरत ही नहीं पड़ेगी: सतवीर सिंह धनोआ

मोहाली :
गमाडा को अपनी मौजूदा खाली पड़ी जमीन के पहले पूरी तरह इस्तेमाल और विकास की ओर ध्यान देना चाहिए। यदि पहले से मौजूद जमीन को योजनाबद्ध तरीके से विकसित कर जनहित में इस्तेमाल किया जाए तो नई कृषि भूमि अधिग्रहण करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे किसानों की जमीन भी बचेगी और शहरी विकास के लिए मौजूदा संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा।
गमाडा को अपनी कार्यप्रणाली और प्लानिंग के तरीकों में बदलाव लाने की जरूरत है। विकास की योजना केवल नई जमीन हासिल करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि पहले से मौजूद सरकारी जमीन, खाली प्लॉटों और लंबे समय से अनुपयोगी पड़ी जमीन को विकसित करने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। जिस उद्देश्य के लिए जमीन ली गई है, उसका इस्तेमाल उसी उद्देश्य के लिए किया जाना चाहिए।
सतवीर सिंह धनोआ, पूर्व पार्षद एवं प्रधान पंजाबी विरसा सांस्कृतिक सोसायटी ने कहा कि गमाडा की स्थापना लोगों को बेहतर रहन-सहन उपलब्ध कराने के लिए हुई थी, न कि बड़े कॉरपोरेट घरानों के हित पूरे करने के लिए। गमाडा के उच्च अधिकारी लोगों द्वारा दिए गए शिकायत एवं अनुरोध पत्रों का जवाब देना भी जरूरी नहीं समझते।
उन्होंने कहा कि उल्लेखनीय है कि गमाडा 35 साल पहले सेक्टर-69 के मास्टर प्लान में दिखाए गए रास्ते को आज तक जमीनी स्तर पर उपलब्ध नहीं करवा सका है। ऐसे में लोग गमाडा से और क्या उम्मीद कर सकते हैं। नीड बेस्ड पॉलिसी, संकरा पुल, गंदा नाला, ओपन एयर थिएटर, पंजाबी भवन, ग्रीन बेल्ट सहित कई अन्य वादे हैं, जो शहर बसाते समय किए गए थे।
उन्होंने कहा कि लोगों में यह धारणा भी बन गई है कि गमाडा की नीतियों का फायदा केवल बिचौलियों और बड़े संस्थानों से जुड़े लोगों को ही मिलता है। इसलिए गमाडा की प्लानिंग पूरी तरह पारदर्शी, जन-केंद्रित और जनहित को ध्यान में रखकर होनी चाहिए। लोगों की दशकों से लंबित बुनियादी जरूरतों और शिकायतों का गमाडा आज तक समाधान नहीं कर सका है, जबकि बड़े संस्थानों के काम करवाने के लिए गमाडा हमेशा तत्पर रहता है।
धनोआ ने कहा कि गमाडा का मुख्य उद्देश्य लोगों के लिए सुव्यवस्थित शहरी विकास होना चाहिए, न कि बेवजह नई जमीन का अधिग्रहण करना। यदि गमाडा ने जनहित में काम शुरू नहीं किए तो गमाडा अधिकारियों के खिलाफ जनहित आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसके लिए लोगों को लामबंद करने का काम शुरू हो चुका है।