
श्रीनगर
राष्ट्रभक्ति के रंग में रंगते हुए सैल्यूट तिरंगा राष्ट्रवादी संगठन ने 4 अगस्त 2025 को जम्मू-कश्मीर की ऐतिहासिक डल लेक से एक विशाल तिरंगा यात्रा की शुरुआत की। हर वर्ष की भांति इस बार भी संगठन ने तिरंगा लहराकर कश्मीर से कन्याकुमारी तक एकता और अखंडता का संदेश दिया।
हज़ारों की संख्या में हिंदू-मुस्लिम नागरिक, विशेषकर मुस्लिम बुजुर्ग, महिलाएं, युवा, छात्र-छात्राएं, स्कूल, कॉलेज और मदरसों के विद्यार्थी इस यात्रा में शामिल हुए। डल लेक पर तिरंगा से सजे शिकारा बोटों के साथ शुरू हुई यह यात्रा देशभक्ति के नारों से गूंज उठी – ‘भारत माता की जय’, ‘जय हिन्द’, ‘सारे जहाँ से अच्छा’।
शिकारा बोट प्रतियोगिता के जरिए लोगों में उत्साह भरा गया। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पाने वाले को ₹31,000 का नकद पुरस्कार दिया गया। इस आयोजन में जामिया सिराज उल उलूम हिल्लोव, मुस्लिम वेलफेयर सोसाइटी श्रीनगर, और महजूर शिक्षण संस्थान बड़गाम जैसे इस्लामिक संगठनों ने भी भाग लेकर गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल पेश की।
कार्यक्रम की अगुवाई राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश झा के नेतृत्व में हुई। प्रमुख पदाधिकारियों में जम्मू-कश्मीर प्रदेश अध्यक्ष शब्बीर अहमद, राष्ट्रीय सचिव फैजान इलाही, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बृजपाल सिंह तेवतिया, राष्ट्रीय महामंत्री रवि चिकारा, और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं हरियाणा-असम प्रभारी नवीन कुमार शामिल रहे।
इस अवसर पर संगठन के राष्ट्रीय संगठन मंत्री और उत्तराखंड के पूर्व मंत्री श्री सच्चिदानंद पोखरियाल ने देशभर और विदेशों में कार्यक्रम को लेकर समन्वय बनाए रखने का कार्य किया।
4 अगस्त से 15 अगस्त तक चलने वाली यह यात्रा सिर्फ जम्मू-कश्मीर ही नहीं, बल्कि भारत के 29 राज्यों और 20 देशों में भी निकाली जा रही है। संगठन ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ और ‘ऑपरेशन महादेव’ जैसे राष्ट्रवादी अभियानों के जरिए कश्मीर से दुनिया को संदेश दे रहा है कि भारत की अखंडता पर किसी भी दृष्टि से समझौता नहीं होगा।
स्थानीय लोगों से लेकर मीडिया प्रतिनिधियों तक, भारी भीड़ ने डल लेक के किनारे ऐतिहासिक नज़ारे का गवाह बनते हुए इस राष्ट्रवादी आंदोलन को ऐतिहासिक बना दिया।
संगठन का उद्देश्य भारतीयों को न केवल भारत में, बल्कि दुनियाभर में जोड़कर भारत को ‘विश्वगुरु’ बनाना है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के विजन की ओर एक सार्थक कदम है।
सैल्यूट तिरंगा की यह यात्रा आज़ादी का जश्न ही नहीं, बल्कि उन राष्ट्रवादी मूल्यों की अभिव्यक्ति है जो भारत को एक सूत्र में पिरोते हैं।
