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सेक्टर 90 PLPA जमीन के स्वैप पर बड़ा विवाद — डिप्टी मेयर बेदी ने NGT में दी शिकायत

सेक्टर 90 PLPA जमीन के स्वैप पर बड़ा विवाद — डिप्टी मेयर बेदी ने NGT में दी शिकायत

मोहाली

सेक्टर 90 की 23 एकड़ जमीन, जो पंजाब लैंड प्रिज़र्वेशन एक्ट (PLPA) के तहत रजिस्टर्ड है और संरक्षित वन क्षेत्र में आती है, को लुधियाना के मटेवाड़ा गांव की जमीन से स्वैप करने के निर्णय ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। डिप्टी मेयर कुलजीत सिंह बेदी ने इस फैसले का जोरदार विरोध करते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में लिखित आपत्ति दर्ज कराई है और इसे मोहाली के हजारों प्लॉट धारकों के साथ “बड़ा धोखा और कानूनी अन्याय” बताया है।

डिप्टी मेयर बेदी ने NGT को भेजे पत्र में कहा कि PLPA के तहत आने वाली जमीन केवल जमीन नहीं, बल्कि एक पारिस्थितिक संपत्ति है। इसका मुख्य उद्देश्य भूमि की ढलान की रक्षा करना, भूमिगत जल का संरक्षण और पर्यावरण की सुरक्षा करना है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में लिखा कि “ऑक्सीजन और पर्यावरण को एक स्थान से दूसरे स्थान पर नहीं भेजा जा सकता। लुधियाना से 100 किलोमीटर दूर के जंगलों को मोहाली लाना संभव नहीं है।”

GMADA और वन विभाग पर गंभीर आरोप

बेदी का दावा है कि GMADA ने वर्षों तक सेक्टर 90 के प्लॉट धारकों को लेटर्स ऑफ इंटेंट (LOI) के नाम पर प्रतीक्षा में रखा, ट्रांसफर फीस और अन्य शुल्क के रूप में करोड़ों रुपये जुटाए, और अब कह रहा है कि उन्हें यह नहीं पता था कि जमीन PLPA के तहत आती है।

बेदी ने कहा —
“अगर यह सच है, तो यह गंभीर लापरवाही है। और अगर उन्हें पता था और फिर भी पैसे लिए गए, तो यह जनता के साथ धोखाधड़ी के समान है।”

PLPA जमीन का स्वैप अवैध

बेदी ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण कानूनों के तहत —

  • PLPA जमीन का किसी अन्य जिले के साथ स्वैप करना अवैध है,

  • PLPA जमीन का शहरी विकास के लिए उपयोग कानून के खिलाफ है,

  • “मोहाली का पर्यावरण लुधियाना में पेड़ लगाकर नहीं बचाया जा सकता।”

उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर यह कानूनी लड़ाई उच्च न्यायालय तक भी ले जाई जाएगी।

प्लॉट धारकों की तत्काल मांग

बेदी ने मांग की कि वर्षों तक शुल्क देने वाले हजारों लोगों को मोहाली के अन्य सेक्टरों में तत्काल प्लॉट आवंटित किए जाएं, ताकि लोग अपने घर बनाने के लिए और प्रतीक्षा न करें।

सरकार का रुख

जानकारी के अनुसार — वन विभाग ने पहले ही मटेवाड़ा, लुधियाना के साथ 23 एकड़ जमीन के स्वैप को मंजूरी दे दी है। फाइल वर्तमान में चंडीगढ़ क्षेत्रीय कार्यालय — केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय में अंतिम मंजूरी के लिए पेंडिंग है। GMADA का कहना है कि जैसे ही मंजूरी मिलेगी, सेक्टर 90 का विकास तुरंत शुरू कर दिया जाएगा।

सामाजिक और कानूनी विवाद बनता जा रहा है

पर्यावरण कार्यकर्ता, प्लॉट धारक और नगर निगम प्रशासन के बीच यह मुद्दा तेजी से बड़ा विवाद बनता जा रहा है। डिप्टी मेयर के NGT तक जाने के बाद यह मामला अब केवल राज्य स्तर का नहीं रहकर राष्ट्रीय स्तर पर न्याय की मांग वाला मुद्दा बन गया है।

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